'उलझन जो सुलझती नही': #JJReview- Breathe: Into the shadow, सीज़न 2

‘ब्रीद’ वेब सीरीज़ अमेज़न प्राइम की लोकप्रिय थ्रिलर श्रृंखला रही है |
'उलझन जो सुलझती नही': #JJReview- Breathe: Into the shadow, सीज़न 2

‘ब्रीद’ वेब सीरीज़ अमेज़न प्राइम की लोकप्रिय थ्रिलर श्रृंखला रही है | हाल ही में इस कड़ी की तीसरी श्रृंखला रिलीज़ हुई लेकिन निर्माताओं ने इसे सीजन 2 ही घोषित किया है। शायद वे अभिषेक बच्चन वाली Breathe: Into the shadow को अलग सीरीज़ की तरह प्रस्तुत करना चाहते हैं। हालांकि Breathe की प्रथम श्रृंखला जिसमे आर माधवन थे आज भी सर्वश्रेष्ठ कही जा सकती है। अभिषेक बच्चन ने भी Breathe: Into the shadow में चमत्कृत किया था और ये उनकी शानदार वापसी थी। 

बात करते हैं वर्तमान 'ब्रीद' सीरीज़ की जिसमें पुनः अभिषेक बच्चन अविनाश सभरवाल और जे नामक दोहरे व्यक्तित्व के संघर्ष को जीते नज़र आते हैं। ' जे' रावण के 10 सिर जिन अवगुणों के प्रतीक हैं उन्ही अवगुणों से भरे उनलोगों की एक के बाद एक हत्या करता जाता है जिन्होंने अविनाश को कभी किसी तरह की तकलीफ पहुंचाई थी। इसमें विक्टर(नवीन कस्तूरिया) नामक एक नया किरदार भी इसबार जोड़ा गया है जो हत्या करने में  ' जे ' की मदद करता है। विक्टर की भी अपनी कहानी है। अविनाश की पत्नी आभा(नित्या मेनन) भी एक मोड़ पर अविनाश की खातिर जे के कहने पर हत्या करती है। ब्रीद श्रृंखला के तीनों भाग में एक पात्र जो मौजूद रहा है वो है पुलिस ऑफिसर कबीर सावंत(अमित साध) जो इस बार भी मुजरिम को पकड़ पाने में असफल ही रहता है।

पूरी श्रृंखला में अभिनय में नवीन कस्तूरिया बाजी मार ले गए हैं।अभिषेक बच्चन, अमित साध, नित्या मेनन का काम पिछली बार की तरह अच्छा है। सयामि खेर अपनी भूमिका में प्रभावित नहीं करती। काफी समय बाद अभिनेता मिंत्रा ने भी नेत्रहीन कलाकार की भूमिका में बेहतरीन अभिनय का परिचय दिया। मयंक शर्मा का निर्देशन सीरीज में क्लाइमैक्स का विकास अच्छी तरह करता है लेकिन कहानी और स्क्रीन प्ले कहीं - कहीं कमज़ोर लगते हैं । कुल मिला कर ब्रीद: इन टू द शैडो,ओटीटी पर फिलहाल एक देखने योग्य श्रृंखला है जो आपको कहीं ऊबने नहीं देती।

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