

29 अगस्त को शाम साढ़े चार बजे हृदयाघात से रंगमंच के महान कलाकार व निर्देशक श्री सतीश आनंद का निधन हो गया |
कला संगम के WhatsApp ग्रुप पर अपने रंगकर्मी दोस्त का ये संदेश .. स्तब्ध कर कर गया ।सभी सन्न रह गए। किसी का हृदय स्वीकार करने को तैयार नहीं था कि हमारे गुरुदेव ,हमारे भैया ..भारतीय नाट्य जगत के आधार स्तंभ.. श्री सतीश आनंद जी देह त्याग कर स्वर्गलोक को प्रस्थान कर गये ।
सतीश जी पूरी दुनिया के लिए हिंदी रंगमंच के पितामह सदृश थे, जिन्होंने रंगमंच को समय समय पर नवीन क्राफ्ट, नवीन सोच से दिशा दी और कभी परंपरागत शैली में प्राण फूंक कर पुनर्जीवित करने का काम किया।
कला संगम नाट्य संस्था उनके सृजन और प्रयोग की साक्षी रही है। उन्होंने भिखारी ठाकुर के बिदेसिया नाटक को एक नाट्य शैली के रूप में गढ़ दिया। सतीश जी ने शूद्रक रचित संस्कृत के ‘मृच्छकटिकम’और फणीश्वर नाथ रेणु रचित हिंदी की कालजयी रचना ‘मैला आँचल ‘को भी बिदेसिया लोकशैली में रूपांतरित कर मंच पर उतार दिया। जुलूस,राजा एडीपस, और तोता बोला, अमली, आधे-अधूरे, तुगलक, अंबपाली, राज दर्शन, एक था गधा इत्यादि .. अनगिनत नाटकों का उन्होंने दिग्दर्शन किया और बिहार और उत्तर भारत को अनेक होनहार अभिनेता तैयार कर के दिए। दिल्ली स्थानांतरित होकर भी उन्होंने अपना नाट्य कर्म उसी प्रेम के साथ जारी रखा।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित।अनेकानेक सम्मान उनकी झोली में स्थान पाकर सम्मानित होते रहे।
सतीश आनंद का देहावसान वस्तुत: रंगमंच के उस युग का अवसान है जिसके प्रणेताओं में वे अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
जानो जंक्शन स्व.श्री सतीश आनंद को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन करता है।